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कड़वाहट

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कड़वाहट

तेरी कड़वाहट को घोल कर पी लिया मैंने,
होंठ बोलना चाहते थे, उन्हें सी लिया मैंने,
जीना गवारा नहीं था तेरे बिन, फिर भी थोड़ा जी लिया मैंने |

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